ITI क्या होता है? ट्रेड, फीस और करियर की पूरी जानकारी

दसवीं या बारहवीं पास करने के बाद हर छात्र के मन में एक ही सवाल घूमता है — आगे क्या करें? कॉलेज की डिग्री लंबी भी है और महंगी भी, और डिग्री के बाद नौकरी मिलेगी या नहीं, इसकी भी कोई गारंटी नहीं होती। ऐसे में बहुत से छात्रों को सलाह मिलती है कि आईटीआई कर लो। लेकिन आईटीआई आखिर है क्या, इसमें पढ़ाया क्या जाता है, और इसे करने के बाद सच में नौकरी मिलती है या नहीं — इन सवालों के सही जवाब बहुत कम लोगों को पता होते हैं।

आईटीआई यानी इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट एक ऐसा प्रशिक्षण संस्थान है जहां छात्रों को किताबी पढ़ाई से ज्यादा हाथों से काम करना सिखाया जाता है। बिजली का काम, मशीन चलाना, वेल्डिंग, कंप्यूटर ऑपरेशन — ये सारे हुनर यहां प्रैक्टिकल तरीके से सिखाए जाते हैं। इस पेज में आईटीआई से जुड़ी हर जरूरी जानकारी विस्तार से दी गई है — योग्यता, ट्रेड्स, फीस, एडमिशन, एनसीवीटी और एससीवीटी का अंतर, अप्रेंटिसशिप और करियर के विकल्प।

इस पेज में:

आईटीआई क्या होता है?

आईटीआई का पूरा नाम इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट है। यह भारत सरकार के कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के अंतर्गत चलने वाला एक व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसका संचालन डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेनिंग यानी डीजीटी करता है। इसका मकसद एकदम साफ है — छात्रों को कम समय में ऐसा हुनर सिखाना जिसकी उद्योगों में सीधी मांग हो।

कॉलेज की पढ़ाई में थ्योरी पर जोर होता है, जबकि आईटीआई में करीब सत्तर प्रतिशत समय प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर खर्च होता है। छात्र वर्कशॉप में मशीनों पर काम करते हैं, वायरिंग करते हैं, वेल्डिंग करते हैं और कंप्यूटर पर काम सीखते हैं। यही वजह है कि आईटीआई पूरा करने वाला छात्र नौकरी के पहले दिन से ही काम पर लग सकता है — उसे अलग से ट्रेनिंग देने की जरूरत नहीं पड़ती। देश भर में हजारों सरकारी और प्राइवेट आईटीआई संस्थान हैं जिनमें लाखों छात्र हर साल प्रशिक्षण लेते हैं।

आईटीआई दूसरे कोर्सों से कैसे अलग है?

सबसे बड़ा अंतर अवधि और खर्च का है। ग्रेजुएशन में तीन से चार साल लगते हैं और फीस भी ज्यादा होती है, जबकि आईटीआई के ज्यादातर ट्रेड एक से दो साल में पूरे हो जाते हैं। दूसरा अंतर पढ़ाई के तरीके का है — यहां रट्टा मारने से ज्यादा हाथ से काम करके सीखने पर जोर दिया जाता है।

तीसरा और सबसे अहम अंतर नौकरी की प्रकृति का है। आईटीआई करने के बाद छात्र टेक्नीशियन, इलेक्ट्रीशियन, फिटर, वेल्डर, कंप्यूटर ऑपरेटर जैसे पदों के लिए तैयार होता है। रेलवे, बिजली विभाग, रक्षा क्षेत्र और सार्वजनिक उपक्रमों में तकनीकी पदों पर आईटीआई सर्टिफिकेट रखने वालों के लिए अलग से भर्तियां निकलती हैं। यानी यह कोर्स सीधे रोजगार से जुड़ा है, सिर्फ डिग्री नहीं देता।

योग्यता और आयु सीमा

आईटीआई में दाखिले की योग्यता ट्रेड के हिसाब से अलग-अलग होती है। ज्यादातर ट्रेड्स के लिए मान्यता प्राप्त बोर्ड से दसवीं पास होना जरूरी है। कुछ ट्रेड्स जैसे वेल्डर, प्लंबर और कारपेंटर आठवीं पास छात्र भी कर सकते हैं। इलेक्ट्रिशियन और फिटर जैसे तकनीकी ट्रेड्स में दसवीं में गणित और विज्ञान विषय होने से थ्योरी समझने में आसानी होती है, इसलिए कई राज्यों में इसे वरीयता दी जाती है।

आयु सीमा की बात करें तो आमतौर पर प्रवेश के समय न्यूनतम आयु चौदह वर्ष होती है। अधिकतम आयु सीमा को लेकर नियम राज्य और ट्रेड के हिसाब से बदल सकते हैं, इसलिए दाखिले से पहले अपने राज्य के आईटीआई पोर्टल पर ताजा नियम जरूर देख लें।

इंजीनियरिंग ट्रेड्स

इंजीनियरिंग ट्रेड्स में मशीनों, बिजली और तकनीकी काम से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जाता है। ये ट्रेड्स उद्योगों में सबसे ज्यादा मांग वाले माने जाते हैं। नीचे लोकप्रिय इंजीनियरिंग ट्रेड्स की सूची दी गई है:

ट्रेड का नाम अवधि न्यूनतम योग्यता
इलेक्ट्रीशियन 2 साल 10वीं पास
फिटर 2 साल 10वीं पास
वेल्डर 1 साल 8वीं पास
टर्नर 2 साल 10वीं पास
मशीनिस्ट 2 साल 10वीं पास
मैकेनिक मोटर व्हीकल 2 साल 10वीं पास
वायरमैन 2 साल 8वीं/10वीं पास
ड्राफ्ट्समैन सिविल 2 साल 10वीं पास
इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक 2 साल 10वीं पास
प्लंबर 1 साल 8वीं/10वीं पास

ऊपर दी गई अवधि और योग्यता सामान्य नियमों पर आधारित है। किसी खास राज्य या संस्थान में इनमें थोड़ा बदलाव हो सकता है, इसलिए फॉर्म भरने से पहले आधिकारिक सूचना जरूर पढ़ें।

नॉन-इंजीनियरिंग ट्रेड्स

नॉन-इंजीनियरिंग ट्रेड्स में दफ्तर, सेवा और हुनर आधारित काम सिखाया जाता है। ये ट्रेड्स उन छात्रों के लिए अच्छे हैं जो मशीनों के बजाय कंप्यूटर, भाषा या डिजाइन से जुड़ा काम करना चाहते हैं:

ट्रेड का नाम अवधि न्यूनतम योग्यता
कोपा (कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट) 1 साल 10वीं पास
स्टेनोग्राफर (अंग्रेजी/हिंदी) 1 साल 10वीं/12वीं पास
सिविंग टेक्नोलॉजी 1 साल 8वीं/10वीं पास
फैशन डिजाइनिंग टेक्नोलॉजी 1 साल 10वीं पास
डाटा एंट्री ऑपरेटर 6 महीने 10वीं पास
कारपेंटर 1 साल 8वीं पास
पेंटर जनरल 2 साल 8वीं/10वीं पास

सही ट्रेड कैसे चुनें?

ट्रेड चुनते समय सिर्फ दोस्तों की देखा-देखी न करें। चार बातों पर ध्यान दें। पहली — आपकी रुचि: जिसे मशीनों से काम करना पसंद है वह इंजीनियरिंग ट्रेड ले, जिसे कंप्यूटर या भाषा का काम पसंद है वह नॉन-इंजीनियरिंग ट्रेड ले। दूसरी — आपके इलाके में काम के मौके: औद्योगिक शहर में इलेक्ट्रीशियन और फिटर की मांग ज्यादा होती है, जबकि दफ्तरों वाले शहर में कोपा और स्टेनोग्राफर के मौके ज्यादा मिलते हैं।

तीसरी — आगे की योजना: अगर रेलवे या बिजली विभाग की तकनीकी नौकरी का लक्ष्य है तो इलेक्ट्रीशियन, फिटर या वेल्डर जैसे ट्रेड बेहतर रहेंगे, क्योंकि इन भर्तियों में इन्हीं ट्रेड्स के सर्टिफिकेट मांगे जाते हैं। चौथी — संस्थान की सुविधा: जिस ट्रेड का चयन करें, उस संस्थान में उसकी वर्कशॉप और प्रशिक्षक उपलब्ध हों, वरना सिर्फ सर्टिफिकेट मिलेगा, हुनर नहीं।

NCVT बनाम SCVT: अंतर समझें

आईटीआई में दाखिला लेते समय सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल यही होता है कि एनसीवीटी और एससीवीटी में क्या अंतर है। दोनों ही मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र हैं, लेकिन इनके दायरे में फर्क है:

पहलू NCVT SCVT
पूरा नाम नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल ट्रेनिंग स्टेट काउंसिल फॉर वोकेशनल ट्रेनिंग
मान्यता का दायरा पूरे देश में मान्य संबंधित राज्य में मान्य
प्रमाणपत्र राष्ट्रीय स्तर का प्रमाणपत्र राज्य स्तर का प्रमाणपत्र
सरकारी नौकरी में केंद्र और राज्य दोनों की भर्तियों में स्वीकार्य आमतौर पर राज्य की भर्तियों में स्वीकार्य
किसके लिए बेहतर जो पूरे देश में नौकरी के मौके चाहते हैं जो अपने राज्य में ही काम करना चाहते हैं

सीधी सलाह यही है कि अगर विकल्प मौजूद हो तो एनसीवीटी से संबद्ध संस्थान को प्राथमिकता दें, क्योंकि इसका प्रमाणपत्र रेलवे, रक्षा और केंद्रीय उपक्रमों की भर्तियों में बिना किसी सवाल के स्वीकार होता है। दाखिले से पहले संस्थान की संबद्धता की पुष्टि जरूर कर लें।

सरकारी बनाम प्राइवेट आईटीआई

सरकारी आईटीआई में फीस बहुत कम होती है और प्रशिक्षक अनुभवी होते हैं, लेकिन सीटें सीमित होती हैं और दाखिला मेरिट के आधार पर मिलता है। प्राइवेट आईटीआई में सीटें आसानी से मिल जाती हैं, लेकिन फीस सरकारी संस्थानों के मुकाबले कई गुना ज्यादा हो सकती है। पढ़ाई की गुणवत्ता संस्थान पर निर्भर करती है — अच्छा प्राइवेट संस्थान खराब सरकारी संस्थान से बेहतर हो सकता है और इसका उल्टा भी सच है।

चुनते समय तीन चीजें जरूर जांचें: संस्थान एनसीवीटी या एससीवीटी से संबद्ध है या नहीं, चुने हुए ट्रेड की वर्कशॉप और मशीनें मौजूद हैं या नहीं, और पिछले वर्षों में वहां से प्रशिक्षण लेकर कितने छात्रों को काम मिला। सिर्फ इमारत देखकर दाखिला न लें।

एडमिशन प्रक्रिया

अधिकांश राज्यों में आईटीआई में दाखिला हर साल दसवीं के नतीजों के बाद शुरू होता है। प्रक्रिया आमतौर पर इस क्रम में होती है: पहले अपने राज्य के आईटीआई प्रवेश पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करें, फिर पसंद के ट्रेड और संस्थानों का विकल्प भरें। इसके बाद दसवीं या आठवीं के अंकों के आधार पर मेरिट सूची जारी होती है। कुछ राज्यों में प्रवेश परीक्षा भी होती है।

मेरिट के आधार पर सीट आवंटित होने के बाद आवंटित संस्थान में जाकर दस्तावेजों का सत्यापन करवाना होता है और फीस जमा करके प्रवेश पक्का करना होता है। जरूरी दस्तावेजों में मार्कशीट, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और पासपोर्ट साइज फोटो शामिल होते हैं। सही सूची के लिए अपने राज्य की प्रवेश सूचना देखें, क्योंकि हर राज्य के नियम थोड़े अलग हो सकते हैं।

आईटीआई की फीस

फीस को लेकर एक ही जवाब हर जगह लागू नहीं होता, क्योंकि यह राज्य, संस्थान और ट्रेड पर निर्भर करती है। सरकारी आईटीआई में सालाना फीस आमतौर पर कुछ हजार रुपये होती है, जो ज्यादातर परिवारों के लिए सस्ती है। प्राइवेट आईटीआई में यही फीस कई गुना ज्यादा हो सकती है — कुछ संस्थानों में यह दसियों हजार रुपये सालाना तक जाती है।

अनुमानित आंकड़ों के चक्कर में न पड़ें। दाखिले से पहले संबंधित संस्थान से फीस की सही जानकारी लिखित में ले लें, ताकि बाद में कोई विवाद न हो। कई राज्यों में आरक्षित वर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए फीस में छूट या छात्रवृत्ति की व्यवस्था भी होती है।

अप्रेंटिसशिप क्या है?

आईटीआई पूरा करने के बाद अप्रेंटिसशिप एक बहुत अहम कदम है। अप्रेंटिसशिप अधिनियम के तहत छात्र किसी फैक्ट्री, रेलवे वर्कशॉप या कंपनी में एक निश्चित अवधि तक काम सीखते हैं और इस दौरान उन्हें स्टाइपेंड भी मिलता है। अप्रेंटिसशिप पूरी करने पर नेशनल अप्रेंटिसशिप सर्टिफिकेट मिलता है, जो नौकरी के बाजार में अलग पहचान रखता है।

रेलवे और कई सार्वजनिक उपक्रमों की भर्तियों में अप्रेंटिसशिप किए हुए उम्मीदवारों को वरीयता मिलती है। इसलिए आईटीआई के बाद अगर तुरंत नौकरी न मिले तो अप्रेंटिसशिप करना समझदारी भरा फैसला होता है — इससे अनुभव भी मिलता है और बायोडाटा भी मजबूत होता है।

सरकारी नौकरियों में करियर

आईटीआई धारकों के लिए सरकारी क्षेत्र में सबसे बड़े मौके रेलवे में हैं। रेलवे की असिस्टेंट लोको पायलट और टेक्नीशियन जैसी भर्तियों में संबंधित ट्रेड का आईटीआई सर्टिफिकेट अनिवार्य योग्यता होती है। इसके अलावा ग्रुप डी की कुछ भर्तियों में भी आईटीआई या अप्रेंटिसशिप को वरीयता मिलती है।

रेलवे के अलावा बिजली विभाग, जल निगम, रक्षा क्षेत्र की वर्कशॉप, इसरो और डीआरडीओ जैसे संस्थानों और राज्य सरकारों के तकनीकी विभागों में भी आईटीआई सर्टिफिकेट पर भर्तियां निकलती हैं। इन भर्तियों में आमतौर पर लिखित परीक्षा और ट्रेड टेस्ट होता है, इसलिए आईटीआई के दौरान हुनर पर ध्यान देना ही सबसे बड़ी तैयारी है।

प्राइवेट नौकरी और स्वरोजगार

प्राइवेट सेक्टर में ऑटोमोबाइल कंपनियों, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों, कंस्ट्रक्शन कंपनियों और सर्विस सेंटरों में आईटीआई प्रशिक्षित युवाओं की लगातार मांग रहती है। शुरुआती वेतन ट्रेड, शहर और कंपनी पर निर्भर करता है, लेकिन अनुभव बढ़ने के साथ इसमें अच्छी बढ़ोतरी होती है।

स्वरोजगार आईटीआई का सबसे खूबसूरत पहलू है। इलेक्ट्रीशियन अपना काम शुरू कर सकता है, वेल्डर अपनी वर्कशॉप खोल सकता है, कोपा किया हुआ छात्र कंप्यूटर सर्विसिंग या डाटा एंट्री का काम कर सकता है। हुनर हाथ में हो तो नौकरी का इंतजार नहीं करना पड़ता — यही आईटीआई की असली ताकत है।

आईटीआई के बाद आगे की पढ़ाई

आईटीआई आखिरी मंजिल नहीं है। इसके बाद क्राफ्ट इंस्ट्रक्टर ट्रेनिंग स्कीम यानी सीआईटीएस करके आईटीआई में ही प्रशिक्षक बना जा सकता है। कई राज्यों में आईटीआई के बाद पॉलिटेक्निक में लेटरल एंट्री मिलती है, यानी सीधे दूसरे वर्ष में दाखिला लेकर डिप्लोमा किया जा सकता है। अप्रेंटिसशिप के साथ-साथ कुछ छात्र डिस्टेंस मोड से आगे की पढ़ाई भी जारी रखते हैं।

लड़कियों के लिए आईटीआई

एक आम धारणा है कि आईटीआई सिर्फ लड़कों के लिए है — यह पूरी तरह गलत है। कोपा, स्टेनोग्राफर, सिविंग टेक्नोलॉजी, फैशन डिजाइनिंग और हेल्थकेयर जैसे ट्रेड्स में लड़कियां बहुत अच्छा कर रही हैं। लेकिन ईमानदारी से यह भी कहना जरूरी है कि इलेक्ट्रीशियन और फिटर जैसे ट्रेड्स में भी लड़कियों के लिए कोई रोक नहीं है — अगर रुचि तकनीकी काम में है तो इन ट्रेड्स से भी बेहतरीन करियर बनता है।

कई राज्यों में लड़कियों के लिए अलग आईटीआई संस्थान भी हैं और कुछ जगहों पर फीस में विशेष छूट मिलती है। ट्रेड चुनते समय लिंग नहीं, अपनी रुचि और इलाके में काम के मौके देखें।

आईटीआई को लेकर आम भ्रांतियां

पहली भ्रांति — आईटीआई करने वालों को सिर्फ मजदूरी मिलती है। सच यह है कि प्रशिक्षित टेक्नीशियन की हर उद्योग में मांग है और अनुभव के साथ वेतन भी बढ़ता है। दूसरी भ्रांति — आईटीआई के बाद पढ़ाई का रास्ता बंद हो जाता है। सच यह है कि सीआईटीएस, पॉलिटेक्निक लेटरल एंट्री और अप्रेंटिसशिप जैसे कई रास्ते खुले हैं।

तीसरी भ्रांति — प्राइवेट आईटीआई का सर्टिफिकेट बेकार होता है। सच यह है कि संबद्धता मायने रखती है, सरकारी-प्राइवेट का ठप्पा नहीं — एनसीवीटी से संबद्ध प्राइवेट संस्थान का प्रमाणपत्र भी पूरे देश में मान्य होता है। चौथी भ्रांति — आईटीआई में सिर्फ कमजोर छात्र जाते हैं। सच यह है कि हुनर आधारित करियर में मेहनती छात्र डिग्रीधारियों से बेहतर कमा रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या आठवीं पास छात्र आईटीआई कर सकता है?

हां। वेल्डर, प्लंबर, कारपेंटर और सिविंग टेक्नोलॉजी जैसे कुछ ट्रेड्स में आठवीं पास छात्र दाखिला ले सकते हैं। हालांकि ज्यादातर लोकप्रिय ट्रेड्स के लिए दसवीं पास होना जरूरी है।

आईटीआई करने में कितना समय लगता है?

ट्रेड के हिसाब से छह महीने से दो साल तक। ज्यादातर इंजीनियरिंग ट्रेड्स दो साल के होते हैं, जबकि कोपा, वेल्डर और स्टेनोग्राफर जैसे ट्रेड एक साल में पूरे हो जाते हैं।

एनसीवीटी और एससीवीटी में से कौन सा बेहतर है?

एनसीवीटी का प्रमाणपत्र पूरे देश में मान्य होता है और केंद्र सरकार की भर्तियों में स्वीकार किया जाता है, इसलिए अगर विकल्प हो तो एनसीवीटी को प्राथमिकता दें।

क्या आईटीआई के बाद सरकारी नौकरी मिल सकती है?

हां। रेलवे की असिस्टेंट लोको पायलट और टेक्नीशियन भर्तियों में आईटीआई अनिवार्य योग्यता है। इसके अलावा बिजली विभाग, रक्षा वर्कशॉप और सार्वजनिक उपक्रमों में भी आईटीआई आधारित भर्तियां निकलती हैं।

आईटीआई की फीस कितनी होती है?

यह राज्य और संस्थान पर निर्भर करती है। सरकारी आईटीआई में फीस आमतौर पर कुछ हजार रुपये सालाना होती है, जबकि प्राइवेट संस्थानों में यह कई गुना ज्यादा हो सकती है। सही जानकारी के लिए संबंधित संस्थान से संपर्क करें।

क्या आईटीआई के बाद अप्रेंटिसशिप जरूरी है?

अनिवार्य नहीं है, लेकिन बहुत फायदेमंद है। अप्रेंटिसशिप से अनुभव मिलता है, स्टाइपेंड मिलता है और नेशनल अप्रेंटिसशिप सर्टिफिकेट मिलता है, जो रेलवे और सार्वजनिक उपक्रमों की भर्तियों में वरीयता दिलाता है।

लड़कियों के लिए कौन सा ट्रेड सबसे अच्छा है?

कोई एक ट्रेड सबसे अच्छा नहीं होता — यह रुचि पर निर्भर करता है। कोपा, स्टेनोग्राफर, फैशन डिजाइनिंग और सिविंग टेक्नोलॉजी लोकप्रिय विकल्प हैं, लेकिन तकनीकी रुचि हो तो इलेक्ट्रीशियन और फिटर जैसे ट्रेड्स में भी लड़कियां सफल करियर बना रही हैं।

Last Updated: 15 October 2026

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