NEET की तैयारी कैसे करें: NCERT रणनीति और योजना

NEET UG भारत में MBBS, BDS और अन्य स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एकमात्र राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा है। इसका आयोजन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) करता है और सिलेबस राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) द्वारा निर्धारित होता है। वर्तमान पैटर्न के अनुसार परीक्षा में 180 अनिवार्य प्रश्न होते हैं, कुल 720 अंक होते हैं और समय 3 घंटे (180 मिनट) मिलता है। सही उत्तर पर 4 अंक मिलते हैं और गलत उत्तर पर 1 अंक काटा जाता है। भौतिकी में 45 प्रश्न, रसायन विज्ञान में 45 प्रश्न और जीव विज्ञान में 90 प्रश्न (वनस्पति विज्ञान 45 और प्राणि विज्ञान 45) होते हैं। जीव विज्ञान का हिस्सा कुल अंकों का 50% है, इसलिए जीव विज्ञान पर सबसे ज़्यादा ध्यान देना तैयारी की सबसे बड़ी कुंजी है।

NEET की तैयारी में सबसे बड़ी मुश्किल सिलेबस का आकार नहीं है, बल्कि तीन विषयों के बीच समय बाँटना है। कक्षा 11 और कक्षा 12 के NCERT पर आधारित सिलेबस बड़ा है, लेकिन प्रश्न सीधे NCERT से आते हैं, खास तौर पर जीव विज्ञान में। इसलिए तैयारी का केंद्र NCERT होना चाहिए, रेफरेंस किताबें उसके बाद आती हैं। इस गाइड में पैटर्न और योग्यता की सही जानकारी, विषय-दर-विषय रणनीति, समय-आधारित योजना, साप्ताहिक समय-सारणी, मॉक टेस्ट की विधि और परीक्षा के दिन की रणनीति दी गई है। हर हिस्से में वही बातें हैं जो परीक्षा के अंक बढ़ाने में सीधा काम आती हैं।

इस पेज में:

NEET पैटर्न और योग्यता: आधिकारिक जानकारी

NTA ने 25 जनवरी 2025 की सार्वजनिक सूचना के द्वारा NEET UG को कोविड से पहले वाले पैटर्न पर वापस ला दिया था। इसके अनुसार सेक्शन B के वैकल्पिक प्रश्न खत्म कर दिए गए और सभी 180 प्रश्न अनिवार्य कर दिए गए। परीक्षा एक ही दिन, एक ही शिफ्ट में, पेन और पेपर मोड (OMR आधारित) में होती है। प्रश्न पत्र 13 भाषाओं में मिलता है, जिनमें हिंदी और अंग्रेज़ी शामिल हैं। PwBD उम्मीदवारों को 3 घंटे की परीक्षा के लिए 1 घंटे का अतिरिक्त समय मिलता है।

विषय प्रश्न अंक
भौतिकी 45 180
रसायन विज्ञान 45 180
जीव विज्ञान (वनस्पति विज्ञान 45 + प्राणि विज्ञान 45) 90 360
कुल 180 720

योग्यता के नियम NMC और NTA के बुलेटिन में दिए होते हैं। उम्मीदवार को प्रवेश के वर्ष के 31 दिसंबर तक 17 वर्ष की आयु पूरी करनी होती है। ऊपर की आयु की कोई सीमा नहीं है और प्रयासों की संख्या पर भी कोई प्रतिबंध नहीं है। शैक्षणिक योग्यता है: कक्षा 12 या समकक्ष परीक्षा में भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान या जैव प्रौद्योगिकी और अंग्रेज़ी विषयों के साथ उत्तीर्ण होना। भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान के कुल अंक General और EWS वर्ग के लिए कम से कम 50%, OBC, SC और ST के लिए 40% और General-PwD के लिए 45% होने चाहिए। कक्षा 12 में पढ़ रहे छात्र भी आवेदन कर सकते हैं।

एक महत्त्वपूर्ण बात 2027 के परीक्षा मोड के बारे में है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने मई 2026 में घोषणा की थी कि NEET UG को 2027 से कंप्यूटर-आधारित परीक्षा (CBT) मोड में लिया जाएगा, और अक्टूबर 2026 में संसदीय समिति ने भी इसकी सिफारिश की थी। लेकिन अगस्त 2026 में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि अंतिम फैसला अभी विचाराधीन है, और 28 अक्टूबर 2026 तक NTA ने इसकी पुष्टि करने वाला कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया था। इसलिए तैयारी करते समय दोनों मोड की संभावना को ध्यान में रखें: NCERT और प्रश्न अभ्यास पर ध्यान दें, और मॉक टेस्ट स्क्रीन पर भी दें, ताकि मोड बदलने पर परीक्षा का अनुभव नया न लगे। अंतिम जानकारी के लिए NTA का सूचना बुलेटिन ही एकमात्र भरोसेमंद स्रोत है।

सिलेबस का नक्शा: विषय और वज़न

NEET का सिलेबस NMC द्वारा निर्धारित है और NCERT की कक्षा 11 और कक्षा 12 की किताबों पर आधारित है। सिलेबस का पूरा विवरण NTA की वेबसाइट पर उपलब्ध होता है। तैयारी के लिए सिलेबस को तीन हिस्सों में बाँटना उचित है: जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान और भौतिकी। जीव विज्ञान में 29-30 अध्याय हैं, रसायन विज्ञान में 30 के आस-पास और भौतिकी में 29 के आस-पास। हर विषय में कुछ अध्याय ऐसे हैं जिनसे हर साल अधिक प्रश्न आते हैं, और कुछ अध्याय ऐसे हैं जिनसे कम प्रश्न आते हैं। पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों के विश्लेषण के अनुसार लगभग वज़न इस प्रकार है।

विषय अधिक वज़न वाले हिस्से अनुमानित हिस्सा
जीव विज्ञान मानव कार्यिकी, आनुवंशिकी और विकास, पारिस्थितिकी, जनन, जैव प्रौद्योगिकी कुल पेपर का 50%
रसायन विज्ञान कार्बनिक रसायन, भौतिक रसायन, अकार्बनिक रसायन (NCERT आधारित) कुल पेपर का 25%
भौतिकी यांत्रिकी, विद्युतगतिकी, आधुनिक भौतिकी, ऊष्मागतिकी कुल पेपर का 25%

जीव विज्ञान में मानव कार्यिकी और आनुवंशिकी मिलाकर कुल पेпер का लगभग एक तिहाई हिस्सा बनाते हैं। इसलिए जीव विज्ञान की तैयारी में इन दोनों हिस्सों को सबसे पहले और सबसे गहरा पढ़ना चाहिए। रसायन विज्ञान में कार्बनिक रसायन का हिस्सा सबसे बड़ा है और इसमें अभिक्रियाओं की क्रियाविधि समझना ज़रूरी है। भौतिक रसायन में गणितीय अभ्यास चाहिए और अकार्बनिक रसायन में NCERT की हर लाइन याद रखनी होती है, खास तौर पर अपवादों वाले तथ्य। भौतिकी में यांत्रिकी और विद्युतगतिकी मिलाकर आधे से अधिक पेपर बनाते हैं, इसलिए इन दोनों को मज़बूत करना सबसे ज़्यादा अंक देता है।

सिलेबस पढ़ते समय एक बात का ध्यान रखें: NMC ने सिलेबस को युक्तिसंगत बनाया है, जिसमें कुछ अध्याय हटाए गए हैं। तैयारी के लिए हमेशा NTA की वेबसाइट पर दिया गया वर्तमान सिलेबस देखें, पुरानी किताबों या पुराने नोट्स पर भरोसा न करें। जो अध्याय सिलेबस से हटाए गए हैं, उन पर समय खर्च करना तैयारी का नुकसान है।

समय-आधारित योजना: 12, 6 और 3 महीने

तैयारी की योजना बचे हुए समय के हिसाब से बदलनी चाहिए। एक ही योजना कक्षा 11 के छात्र और 3 महीने बचे हुए ड्रॉपर दोनों के लिए काम नहीं करती। नीचे तीन अलग समय-सीमा के लिए योजना दी गई है। हर योजना में तीन चरण हैं: सिलेबस पूरा करना, अभ्यास और पिछले वर्षों के प्रश्न, और रिवीजन और मॉक टेस्ट। समय कम होने पर पहला चरण छोटा होता है और तीसरा चरण बड़ा होता है।

12 महीने की योजना (कक्षा 11 से शुरुआत या जल्दी शुरू करने वाले)। पहले 4 महीने में कक्षा 11 का सिलेबस NCERT से लाइन-दर-लाइन पढ़ें और हर अध्याय के बाद 30-50 प्रश्न हल करें। अगले 4 महीने में कक्षा 12 का सिलेबस पूरा करें और कक्षा 11 का पहला रिवीजन करें। आखिरी 4 महीने में दूसरा और तीसरा रिवीजन, पिछले 10 वर्षों के प्रश्न और हर हफ्ते एक पूरा मॉक टेस्ट रखें। इस योजना में रोज़ 5-6 घंटे का अध्ययन काफी होता है, क्योंकि समय अधिक है और स्कूल के साथ तैयारी चलती है।

6 महीने की योजना (कक्षा 12 के छात्र या ड्रॉपर)। पहले 2 महीने में NCERT का पहला पाठन पूरा करें: जीव विज्ञान रोज़, भौतिकी और रसायन विज्ञान बदल-बदल कर। तीसरे और चौथे महीने में रेफरेंस किताबों से अभ्यास बढ़ाएँ और रोज़ 50-80 प्रश्न हल करें, हफ्ते में एक मॉक टेस्ट दें। पाँचवें महीने में 4000 से अधिक प्रश्न हल करें और हफ्ते में 2-3 मॉक टेस्ट दें। छठे महीने में केवल रिवीजन और मॉक टेस्ट रखें, कोई नया विषय शुरू न करें। इस योजना में रोज़ 7-9 घंटे का अध्ययन चाहिए होता है।

3 महीने की योजना (अंतिम चरण, सिलेबस एक बार पढ़ चुके उम्मीदवार)। पहला महीना: जीव विज्ञान का NCERT दूसरी बार पढ़ें, भौतिकी के सूत्र और रसायन विज्ञान की अभिक्रियाओं की सूची तैयार करें, रोज़ 100 प्रश्न हल करें। दूसरा महीना: पिछले 10 वर्षों के प्रश्न अध्याय-दर-अध्याय हल करें और हफ्ते में 2 मॉक टेस्ट दें। तीसरा महीना: केवल रिवीजन और मॉक टेस्ट, हर मॉक का विश्लेषण करके कमज़ोर अध्याय पर वापस जाएँ। इस योजना में रोज़ 8-10 घंटे का अध्ययन और हफ्ते में 3 मॉक टेस्ट चाहिए होते हैं। नया विषय शुरू करना इस योजना में सबसे बड़ी गलती है।

विषय-दर-विषय रणनीति

जीव विज्ञान। जीव विज्ञान NEET का आधा पेपर है और इसके अधिकतर प्रश्न सीधे NCERT से आते हैं। रणनीति सीधी है: NCERT को 4-5 बार पढ़ें। पहली बार समझने के लिए, दूसरी बार महत्त्वपूर्ण तथ्यों को चिह्नित करने के लिए, तीसरी बार गति से दोहराने के लिए और चौथी-पाँचवीं बार केवल चिह्नित हिस्सों और अपवादों के लिए। हर अध्याय के डायग्राम को खुद बनाकर देखें, क्योंकि डायग्राम पर आधारित प्रश्न हर साल आते हैं। NCERT के उदाहरण और पाठ के बीच दिए गए प्रश्नों को कभी न छोड़ें। रेफरेंस किताब के रूप में MTG की NCERT at Your Fingertips उपयोगी मानी जाती है, लेकिन वह NCERT की जगह नहीं ले सकती।

भौतिकी। भौतिकी में अंक लाना सबसे मुश्किल माना जाता है, क्योंकि इसमें अवधारणा और गणित दोनों चाहिए। रणनीति है: अवधारणा सीखें, सूत्र व्युत्पन्न करें और हर अध्याय के 50-70 आंकिक प्रश्न हल करें। H.C. Verma या D.C. Pandey की किताबें आंकिक अभ्यास के लिए मानक मानी जाती हैं। सूत्रों की एक शीट बनाएँ और उसे रोज़ दोहराएँ। यांत्रिकी और विद्युतगतिकी पर सबसे ज़्यादा समय दें, क्योंकि इनका वज़न सबसे अधिक है। आधुनिक भौतिकी अपेक्षाकृत आसान और अधिक अंक देने वाला हिस्सा है, इसलिए उसे अंत तक न छोड़ें।

रसायन विज्ञान। रसायन विज्ञान को तीन हिस्सों में बाँटकर तैयार करें। भौतिक रसायन में गणना और सूत्रों का अभ्यास चाहिए, इसलिए रोज़ 20-30 आंकिक प्रश्न हल करें। कार्बनिक रसायन में अभिक्रियाओं की क्रियाविधि समझना ज़रूरी है: केवल अभिक्रिया रटना काफी नहीं है, क्योंकि प्रश्न क्रियाविधि पर आधारित होते हैं। नामित अभिक्रियाओं की सूची बनाएँ और उन्हें हफ्ते में एक बार दोहराएँ। अकार्बनिक रसायन में NCERT ही सब कुछ है: हर टेबल, हर अपवाद और हर तथ्य NCERT से आता है। अकार्बनिक के लिए NCERT को बार-बार पढ़ना ही एकमात्र रणनीति है।

साप्ताहिक समय-सारणी और चेकलिस्ट

नीचे एक साप्ताहिक समय-सारणी दी गई है जो 6 महीने की योजना के लिए है। समय को अपने स्कूल या कोचिंग के हिसाब से बदल सकते हैं, लेकिन तीन नियम बदलने नहीं चाहिए: जीव विज्ञान को सबसे ज़्यादा समय, रोज़ रिवीजन का निश्चित समय और हफ्ते में एक मॉक टेस्ट।

समय गतिविधि
सुबह 6:00–8:30 जीव विज्ञान NCERT पाठन और प्रश्न
सुबह 9:00–11:00 भौतिकी: अवधारणा और आंकिक प्रश्न
दोपहर 12:00–2:00 रसायन विज्ञान: सिद्धांत और अभ्यास प्रश्न
दोपहर 3:00–4:30 कमज़ोर विषय या पिछले वर्षों के प्रश्न
शाम 5:00–6:30 जीव विज्ञान प्रश्न और डायग्राम अभ्यास
रात 7:30–9:00 दिन भर के विषयों का रिवीजन और गलती-रजिस्टर
रविवार पूरा मॉक टेस्ट (3 घंटे) और उसका विश्लेषण

साप्ताहिक चेकलिस्ट: (1) जीव विज्ञान के 3-4 अध्याय NCERT से पूरे किए। (2) भौतिकी के 2 अध्याय के आंकिक प्रश्न हल किए। (3) रसायन विज्ञान के 2 अध्याय पूरे किए। (4) कम से कम 300 प्रश्न हल किए। (5) एक मॉक टेस्ट दिया और उसका विश्लेषण किया। (6) गलती-रजिस्टर में नई गलतियाँ दर्ज की। (7) पिछले हफ्ते के कमज़ोर अध्याय का रिवीजन किया। जो काम चेकलिस्ट में पूरा न हो, उसे अगले हफ्ते की योजना में पहले रखें।

मॉक टेस्ट और गलती-रजिस्टर

मॉक टेस्ट तैयारी का सबसे महत्त्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन केवल मॉक टेस्ट देना काफी नहीं है। मॉक टेस्ट का विश्लेषण ही अंक बढ़ाता है। मॉक टेस्ट देने की गति इस प्रकार रखें: तैयारी के शुरुआती महीनों में 10-15 दिन में एक, बीच के महीनों में हफ्ते में एक और अंतिम 3 महीनों में हफ्ते में 2-3 मॉक टेस्ट। हर मॉक टेस्ट को परीक्षा जैसी स्थिति में दें: 3 घंटे का निर्धारित समय, बिना रुके, बिना फ़ोन के और परीक्षा के समय के आस-पास। मॉक टेस्ट के बाद कम से कम 2 घंटे उसके विश्लेषण में दें।

गलती-रजिस्टर एक नोटबुक या फ़ाइल है जिसमें हर गलत प्रश्न दर्ज होता है: अध्याय, परीक्षित अवधारणा और गलत होने का कारण। कारण को तीन वर्गों में बाँटें: अवधारणा की कमी, लापरवाही वाली गलती और समय की कमी। अवधारणा की कमी वाले विषयों को दोबारा पढ़ें। लापरवाही वाली गलतियों को परीक्षा के दिन की चेकलिस्ट में डालें। समय की कमी वाले हिस्सों का अभ्यास समय सीमा के साथ करें। गलती-रजिस्टर की हफ्ते में एक बार समीक्षा करें। जो गलती दो बार हो जाए, उसे लाल निशान से चिह्नित करें और उस अध्याय को रिवीजन की सूची में सबसे ऊपर रखें।

पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ) मॉक टेस्ट के बाद सबसे उपयोगी अभ्यास हैं। कम से कम 10 वर्षों के प्रश्न अध्याय-दर-अध्याय हल करें। PYQ से दो बातें पता चलती हैं: कौन से अध्याय से किस प्रकार के प्रश्न आते हैं और प्रश्नों का कठिनाई स्तर क्या होता है। NTA का Abhyas App भी मुफ्त मॉक टेस्ट देता है और उसका अभ्यास परीक्षा के पैटर्न से परिचित कराता है।

रिवीजन प्रणाली: NCERT को बार-बार पढ़ना

रिवीजन के बिना तैयारी अधूरी रहती है, क्योंकि NEET में तथ्य याद रखना ही अंक देता है। रिवीजन की प्रणाली तीन स्तरों पर चलनी चाहिए: रोज़, हफ्ते और महीने। रोज़ रात को 30 मिनट पिछले दिन के विषयों को दोहराएँ। हफ्ते में एक विषय का पूरा रिवीजन शॉर्ट नोट्स से करें। महीने में पूरे सिलेबस का तेज़ी से अवलोकन करें। जीव विज्ञान के लिए NCERT को 5 बार पढ़ने का लक्ष्य रखें: पहली बार समझने के लिए (लगभग 50 घंटे), दूसरी बार चिह्नित करने के लिए (40 घंटे), तीसरी बार गति से (25 घंटे), चौथी बार केवल चिह्नित हिस्सों के लिए (15 घंटे) और अंतिम बार परीक्षा से पहले केवल डायग्राम और अपवादों के लिए (8 घंटे)।

रिवीजन के लिए शॉर्ट नोट्स सबसे उपयोगी होते हैं। हर अध्याय के लिए एक पेज का नोट बनाएँ जिसमें केवल सूत्र, अपवाद, डायग्राम और एक लाइन वाले तथ्य हों। ये नोट्स अंतिम महीने में पूरे सिलेबस को 2-3 दिन में दोहराने में काम आते हैं। फॉर्मूला शीट भौतिकी और भौतिक रसायन के लिए अलग से बनाएँ और उसे रोज़ सुबह 15 मिनट देखें। नामित अभिक्रियाओं की सूची कार्बनिक रसायन के लिए अलग से रखें।

स्कूल के साथ और ड्रॉपर के लिए बदलाव

कक्षा 12 के छात्र। स्कूल के साथ तैयारी में NEET सिलेबस और बोर्ड सिलेबस का ओवरलैप सबसे बड़ा सहारा है, क्योंकि दोनों NCERT पर आधारित हैं। NCERT से ही दोनों की तैयारी करें। बोर्ड के लिए उत्तर लेखन का अभ्यास और डायग्राम पर ध्यान दें, NEET के लिए MCQ अभ्यास और रेफरेंस किताबें जोड़ें। समय को 60% NEET और 40% बोर्ड के हिसाब से बाँटें। स्कूल के घंटों के बाद 5-6 घंटे का अध्ययन काफी होता है, लेकिन रोज़ का नियम टूटना नहीं चाहिए। बोर्ड परीक्षा के महीने में NEET की तैयारी रोकनी नहीं है, केवल गति कम करनी है।

ड्रॉपर (रिपीटर)। ड्रॉपर को 9-11 घंटे रोज़ पढ़ना चाहिए, क्योंकि स्कूल की बंदिश नहीं होती। शुरुआत में एक निदानात्मक टेस्ट दें और कमज़ोर अध्यायों की सूची बनाएँ। पहले 2 हफ्ते केवल कक्षा 11 के कमज़ोर विषयों पर दें, फिर मुख्य योजना पर आएँ। पिछले वर्षों के प्रश्न पहले दिन से शुरू करें। लक्ष्य पिछले साल के स्कोर से ऊँचा रखें और उन कॉलेजों की अंतिम रैंक देखें जिनमें प्रवेश चाहिए था। ड्रॉपर के लिए सबसे बड़ा खतरा है एक ही विषय पर अटका रहना: हर हफ्ते तीनों विषयों का संतुलन बनाए रखें।

आम गलतियाँ

गलती 1: जीव विज्ञान को कम समय देना। जीव विज्ञान 50% अंक देता है, इसलिए उसे 40% समय मिलना चाहिए। भौतिकी को अधिक समय देने से कुल अंक नहीं बढ़ते।

गलती 2: NCERT छोड़कर केवल रेफरेंस किताबें पढ़ना। जीव विज्ञान और अकार्बनिक रसायन के प्रश्न सीधे NCERT से आते हैं; रेफरेंस किताब NCERT की जगह नहीं ले सकती।

गलती 3: मॉक टेस्ट देना लेकिन विश्लेषण नहीं करना। बिना विश्लेषण के मॉक टेस्ट से केवल समय निकलता है, सुधार नहीं होता।

गलती 4: नए विषय अंतिम महीने में शुरू करना। अंतिम महीने में केवल रिवीजन होना चाहिए; नया विषय आत्म-विश्वास तोड़ता है।

गलती 5: कक्षा 11 के विषयों को हल्का लेना। कक्षा 11 के अध्याय कुल प्रश्नों का लगभग आधा हिस्सा बनाते हैं, इसलिए इन्हें पहले महीनों में पूरा करना ज़रूरी है।

गलती 6: नींद और स्वास्थ्य की उपेक्षा करना। रोज़ 7-8 घंटे की नींद याद रखने के लिए ज़रूरी है; नींद कम करने से रिवीजन बेकार हो जाता है।

परीक्षा के दिन की रणनीति

परीक्षा के दिन प्रश्न हल करने का क्रम पहले से तय करें। सबसे आम और सफल क्रम है: जीव विज्ञान, फिर रसायन विज्ञान, फिर भौतिकी। जीव विज्ञान सबसे तेज़ी से हल होता है और आत्म-विश्वास बढ़ाता है। रसायन विज्ञान बीच में रखें, क्योंकि इसमें कुछ प्रश्न तेज़ी से हल होते हैं और कुछ समय लेते हैं। भौतिकी को अंत में रखें, क्योंकि इसमें गणना में समय लगता है और अंत में दबाव अधिक होता है। समय का विभाजन इस प्रकार रखें: जीव विज्ञान के लिए 50-60 मिनट, रसायन विज्ञान के लिए 45-50 मिनट और भौतिकी के लिए 60-70 मिनट, बचा हुआ समय OMR भरने और छोड़े गए प्रश्नों के लिए।

OMR शीट भरते समय सावधानी रखें: हर 10-15 प्रश्न के बाद OMR में उत्तर भरें, अंतिम में एक साथ भरना गलती का कारण बनता है। अनुमान पर उत्तर देने से बचें, क्योंकि गलत उत्तर पर 1 अंक काटा जाता है। जिन प्रश्नों में दो विकल्प लगभग बराबर लगें, उन्हें अंत में दोबारा देखें। परीक्षा केंद्र पर समय से पहले पहुँचें और प्रवेश पत्र, फोटो और पहचान पत्र साथ रखें। परीक्षा से पहले की रात को नया कुछ न पढ़ें; हल्का रिवीजन और पूरी नींद ही सबसे अच्छी तैयारी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

NEET में कितने प्रश्न होते हैं और कुल कितने अंक होते हैं? कुल 180 अनिवार्य प्रश्न होते हैं और कुल 720 अंक होते हैं। भौतिकी में 45, रसायन विज्ञान में 45 और जीव विज्ञान में 90 प्रश्न होते हैं।

NEET की तैयारी के लिए NCERT काफी है? जीव विज्ञान और अकार्बनिक रसायन के लिए NCERT लगभग पूरी तैयारी है। भौतिकी और भौतिक रसायन के लिए NCERT के साथ आंकिक अभ्यास के लिए रेफरेंस किताब चाहिए होती है।

NEET के लिए रोज़ कितने घंटे पढ़ना चाहिए? 6 महीने की तैयारी में रोज़ 7-9 घंटे, 12 महीने की तैयारी में रोज़ 5-6 घंटे का अध्ययन काफी होता है। घंटों से ज़्यादा नियमितता महत्त्वपूर्ण है।

क्या NEET में प्रयासों की सीमा है? नहीं, प्रयासों की संख्या पर कोई प्रतिबंध नहीं है और ऊपर की आयु की सीमा भी नहीं है। न्यूनतम आयु प्रवेश के वर्ष के 31 दिसंबर तक 17 वर्ष है।

NEET 2027 कंप्यूटर पर होगा या कागज़ पर? 2027 से कंप्यूटर-आधारित परीक्षा का प्रस्ताव है और इसकी सिफारिश हुई है, लेकिन 28 अक्टूबर 2026 तक NTA ने अंतिम फैसले की पुष्टि नहीं की थी। अंतिम जानकारी NTA के सूचना बुलेटिन से मिलेगी।

Last Updated: 29 October 2026

Exit mobile version