भारत में नर्सरी क्लास का कोई आधिकारिक विषय-वार सिलेबस मौजूद नहीं है। NCERT टॉपिक-सूची नहीं देता — सिर्फ विकासात्मक दिशा-निर्देश देता है (प्रीस्कूल शिक्षा के लिए दिशा-निर्देश, एनसीएफ बुनियादी चरण 2022)। हर स्कूल अपना सिलेबस खुद बनाता है, इसलिए इंटरनेट पर जो “नर्सरी सिलेबस” मिलते हैं, वे अलग-अलग स्कूलों के अपने प्लान हैं।
फिर भी, देश-भर के स्कूलों में आम तौर पर यह सिखाया जाता है: प्री-राइटिंग स्ट्रोक (खड़ी, लेटी, तेढ़ी लाइनें), कैपिटल A-Z की पहचान, अ से ज्ञ, 1 से 20 तक गिनती, आकृतियां और रंग, “मेरा परिचय, मेरा परिवार, जानवर” जैसे सामान्य ज्ञान के विषय, कविताएं-कहानियां और आर्ट-क्राफ्ट। इस गाइड में विषय-वार सूची, महीने-वार प्लान, एडमिशन की उम्र और मां-बाप के लिए घर की गतिविधियां — सब कुछ एक जगह दिया गया है।
इस पेज में:
- पहले एक जरूरी सच: कोई आधिकारिक सिलेबस नहीं है
- NCERT के 3 आधिकारिक दस्तावेज क्या कहते हैं
- नर्सरी में आम तौर पर क्या सिखाया जाता है (विषय-वार)
- महीने-वार प्लान: अप्रैल से मार्च तक
- घर पर मां-बाप क्या कराएं: 15 गतिविधियां
- नर्सरी में एडमिशन की उम्र कितनी?
- नर्सरी बनाम LKG बनाम UKG: अंतर
- नर्सरी के लिए स्कूल चुनते समय क्या देखें
- बच्चे पर दबाव न डालें
- माता-पिता की आम गलतियाँ
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- आधिकारिक जानकारी कहां से लें
पहले एक जरूरी सच: कोई आधिकारिक सिलेबस नहीं है
बहुत सी वेबसाइटें “CBSE नर्सरी सिलेबस” या “बोर्ड का सिलेबस” लिखकर गलत प्रभाव देती हैं। सच यह है:
- CBSE, ICSE या कोई भी बोर्ड नर्सरी क्लास का विषय-वार सिलेबस प्रकाशित नहीं करता। प्री-प्राइमरी स्तर पर बोर्ड का कोई निर्धारित पाठ्यक्रम नहीं होता।
- NCERT भी टॉपिक-सूची नहीं देता। NCERT के दस्तावेज सिर्फ यह बताते हैं कि 3-6 साल के बच्चों का विकास कैसे होना चाहिए, खेल-खेल में सिखाना चाहिए, रट्टा नहीं लगवाना चाहिए — लेकिन “अप्रैल में यह पढ़ाओ, मई में यह” जैसी सूची नहीं देते।
- हर स्कूल अपना सिलेबस खुद बनाता है। इसीलिए एक स्कूल में गिनती 1-30 तक है तो दूसरे में 1-20 तक — दोनों सही हैं।
इस गाइड में जो विषय-सूची और महीने-वार प्लान दिया गया है, वह देश-भर के स्कूलों के आम पैटर्न पर आधारित है, किसी बोर्ड का आधिकारिक आदेश नहीं। यही ईमानदारी इस पेज को दूसरी वेबसाइटों से अलग करती है।
NCERT के 3 आधिकारिक दस्तावेज क्या कहते हैं
| दस्तावेज | जारी करने वाला | मुख्य बात |
|---|---|---|
| प्रीस्कूल शिक्षा के लिए दिशा-निर्देश | NCERT | 3-6 साल के बच्चों के लिए प्रीस्कूल; कक्षा 1 से पहले 3 साल का प्रीस्कूल; खेल-आधारित शिक्षा, शुरुआती सीखने के परिणाम — कोई तय टॉपिक-सूची नहीं |
| प्रीस्कूल पाठ्यचर्या | NCERT | प्रीस्कूल कक्षा 1, 2, 3 (3 साल) के लिए लक्ष्य और शिक्षण-प्रक्रिया; विकासात्मक दृष्टिकोण, रट्टा-विरोधी |
| एनसीएफ बुनियादी चरण 2022 (एनईपी 2020) | NCERT | 3-8 साल के बच्चों के लिए पहला एकीकृत ढांचा; बुनियादी चरण = प्रीस्कूल से कक्षा 2 तक; कक्षा 1 की शुरुआत 6 साल की उम्र में; सीखने के 5 क्षेत्र; खेल-आधारित शिक्षा अनिवार्य, औपचारिक परीक्षा नहीं |
इन सब का एक ही संदेश है: नर्सरी में बच्चा खेल-खेल में सीखे, दबाव में नहीं। एनसीएफ 2022 बच्चे के विकास के 5 आयाम बताता है — शारीरिक विकास, सामाजिक-भावनात्मक और नैतिक विकास, संज्ञानात्मक विकास, भाषा और साक्षरता विकास, तथा सौंदर्यबोध और सांस्कृतिक विकास। नर्सरी की हर गतिविधि इन्हीं पांचों में से किसी न किसी आयाम को मज़बूत करती है।
इन दस्तावेज़ों का व्यावहारिक अर्थ यह है कि नर्सरी में किसी एक तय किताब या तय टॉपिक की अपेक्षा रखना ही गलत शुरुआत है। दिशा-निर्देश विकास की दिशा बताते हैं — बच्चा अपने आसपास की दुनिया को पहचाने, भाषा सुनकर-बोलकर सीखे, हाथों से बनाते हुए उंगलियों को मजबूत करे और दूसरे बच्चों के साथ घुलना-मिलना सीखे। इसीलिए दो अच्छे स्कूलों के प्लान अलग दिख सकते हैं, फिर भी दोनों NCERT की भावना के अनुरूप हो सकते हैं।
नर्सरी में आम तौर पर क्या सिखाया जाता है (विषय-वार)
नीचे दी गई विषय-सूची को किताबी विषयों की तरह न समझें। इस उम्र में हर “विषय” असल में विकास का एक क्षेत्र है: स्ट्रोक और रंग-भरना हाथ की पकड़ बनाते हैं, कविताएं भाषा और याददाश्त को, गिनती और आकृतियां सोचने की बुनियाद को, और सामान्य ज्ञान बच्चे के अपने आसपास की दुनिया को। इसीलिए क्रम भी सोचकर रखा गया है — पहले पहचान और बोलना, लिखना सबसे बाद में।
अंग्रेज़ी
- प्री-राइटिंग स्ट्रोक: खड़ी रेखा, लेटी रेखा, तिरछी रेखा, गोल घुमाव (ये सबसे पहले सिखाए जाते हैं, अक्षरों से पहले)
- कैपिटल अक्षर A-Z की पहचान (बोलना और पहचानना; लिखना बाद में)
- फोनिक्स की शुरुआत: हर अक्षर की आवाज़
- सरल कविताएं: “ट्विंकल-ट्विंकल”, “बा-बा ब्लैक शीप” जैसी
हिंदी
- स्वर और व्यंजन की पहचान: अ से ज्ञ
- हिंदी कविताएं: “मछली जल की रानी”, “आलू कचालू” जैसी
- बोल-चाल में शुद्ध उच्चारण पर ध्यान
गणित (प्री-मैथ्स)
- प्री-मैथ्स अवधारणाएं: बड़ा-छोटा, लंबा-छोटा, ऊपर-नीचे, अंदर-बाहर, भारी-हल्का
- गिनती: 1 से 20 तक (बोलना, पहचानना; कुछ स्कूलों में 1-30)
- आकृतियां: गोल, चौकोर, त्रिकोण
- रंग: लाल, नीला, पीला, हरा, काला, सफेद — पहचान और नाम
सामान्य ज्ञान
- मेरा परिचय: मेरा नाम, उम्र, शरीर के अंग
- मेरा परिवार: मां, पापा, भाई-बहन
- मौसम: गर्मी, सर्दी, बरसात
- जानवर: पालतू और जंगली जानवर, उनकी आवाजें
- फल और सब्जियों की पहचान
- यातायात: कार, बस, ट्रेन, हवाई जहाज
कविताएं, कहानियां और गतिविधियां
- हिंदी-अंग्रेज़ी कविताएं रोज़
- छोटी कहानियां (पंचतंत्र जैसी सरल)
- आर्ट और क्राफ्ट: रंग भरना, कागज फाड़ना-चिपकाना, मिट्टी से आकृतियां
- शारीरिक: दौड़ना, कूदना, गेंद खेलना, एक्शन सॉन्ग
सूची में एक क्रम साफ दिखता है — जो काम आंख और कान से होता है (पहचानना, सुनना, बोलना), वह पहले आता है; जो काम हाथ की परिपक्व पकड़ मांगता है (लिखना), वह बाद में। यही कारण है कि अंग्रेज़ी में भी A-Z की पहचान और फोनिक्स पहले हैं और अक्षर लिखना LKG की ओर छोड़ा गया है। घर पर अभ्यास कराते समय भी यही क्रम रखें — पहले दिखाकर नाम बुलवाएं, लिखवाने की जल्दी न करें।
महीने-वार प्लान: अप्रैल से मार्च तक
नोट: यह किसी बोर्ड का आधिकारिक प्लान नहीं है — स्कूलों के आम पैटर्न पर आधारित एक संभावित प्लान है। हर स्कूल का अपना कैलेंडर हो सकता है।
- अप्रैल-मई: स्कूल से जुड़ना, दोस्त बनाना; प्री-राइटिंग स्ट्रोक (खड़ी-लेटी लाइनें); रंगों की पहचान; सरल कविताएं
- जून-जुलाई: तेढ़ी लाइनें और कर्व; A-E अक्षर; अ-इ; 1 से 5 तक गिनती
- अगस्त: F-J अक्षर; 6-10 गिनती; आकृतियां (गोल, चौकोर); बरसात पर कविताएं
- सितंबर: K-O अक्षर; 11-15 गिनती; “मेरा परिचय” और “मेरा परिवार” थीम
- अक्टूबर: P-T अक्षर; 16-20 गिनती; जानवर थीम; त्योहारों पर गतिविधियां
- नवंबर: U-Z अक्षर; फल-सब्जी पहचान; दोहराव
- दिसंबर: अ से ज्ञ पूरा; गिनती दोहराव; सर्दी/मौसम थीम
- जनवरी: सरल शब्दों की पहचान; छोटी कहानियां
- फरवरी-मार्च: पूरे साल का दोहराव — कोई औपचारिक परीक्षा नहीं, खेल-आधारित मूल्यांकन
इस प्लान की बनावट में भी वही क्रम दिखता है जो विषय-सूची में है। साल की शुरुआत जुड़ाव और स्ट्रोक से होती है, बीच के महीनों में अक्षर और गिनती धीरे-धीरे बढ़ते हैं, और अंत में नया कुछ थोपने के बजाय दोहराव रखा गया है। यदि आपका स्कूल किसी थीम को एक महीना आगे-पीछे रखता है तो वह सामान्य है। असली जांच यह है कि साल पूरा होते-होते बच्चा पहचान, बोलचाल और हाथ की तैयारी में सहज हो गया हो।
घर पर मां-बाप क्या कराएं: 15 गतिविधियां
स्कूल के साथ घर पर ये सरल गतिविधियां बच्चे के विकास में सबसे ज्यादा मदद करती हैं:
- ट्रेसिंग खेल: आटे या रेत पर उंगली से लाइनें और गोल-गोल घुमाना — लिखने की तैयारी
- रंग छांटना: कपड़े या खिलौने रंग के हिसाब से अलग करवाना
- प्रकृति सैर: रोज 15 मिनट बाहर — पेड़, फूल, पक्षी दिखाना और नाम बताना
- कहानी का समय: रोज सोने से पहले 10 मिनट कहानी सुनाना
- कविताएं गाना: काम करते हुए बच्चे के साथ कविताएं गाना
- बड़ा-छोटा खेल: बर्तन या ब्लॉक से तुलना करवाना
- रंग मिलाना: पानी में रंग मिलाकर नया रंग बनाना
- गिनना: सीढ़ी चढ़ते या खाना परोसते हुए 1-10 गिनना
- अपनी जानकारी: नाम, उम्र, मां-पापा का नाम याद करवाना
- मुक्त चित्रकारी: कॉपी पर आज़ाद आड़ी-तिरछी लकीरें — सही-गलत न टोकना
- कागज फाड़ना: कागज फाड़कर चिपकाना — उंगलियों की मजबूती के लिए
- फल-सब्जी पहचान: बाजार से आई सब्जी दिखाकर नाम पूछना
- ऊपर-नीचे खेल: घर की चीजों से दिशा सिखाना
- मिट्टी की आकृतियां: आटे की लोई से गोल, लंबा बनाना
- शिष्टाचार: धन्यवाद, माफ़ कीजिए, नमस्ते रोज़ इस्तेमाल करवाना
इन गतिविधियों को रोज़ सारी कराने की जरूरत नहीं है। हर दिन दो-तीन गतिविधियां, वे भी खेल के मूड में, पर्याप्त हैं। ध्यान दें कि इनमें से अधिकतर उंगलियों और हाथ की मजबूती से जुड़ी हैं — ट्रेसिंग, कागज फाड़ना, मिट्टी गूंथना — क्योंकि लिखने की असली तैयारी कॉपी पर नहीं, इन्हीं हाथ के कामों से होती है। बच्चा मना करे तो जबरदस्ती न करें; गतिविधि बदल देना दबाव डालने से बेहतर है।
नर्सरी में एडमिशन की उम्र कितनी?
एनसीएफ बुनियादी चरण 2022 के अनुसार कक्षा 1 की शुरुआत 6 साल की उम्र में होनी चाहिए। इस हिसाब से:
- नर्सरी (प्रीस्कूल का पहला साल): 3+ साल
- LKG: 4+ साल
- UKG: 5+ साल
- कक्षा 1: 6+ साल
जरूरी नोट: नर्सरी एडमिशन की सटीक उम्र राज्य और स्कूल के नियम पर निर्भर करती है — कई शहरों में 31 मार्च तक 3 साल पूरे होने का नियम है। यह NCERT का नियम नहीं है, इसलिए एडमिशन से पहले स्कूल से लिखित में पूछ लेना सबसे सुरक्षित है।
इस उम्र-क्रम को सीढ़ी की तरह समझें — हर साल का अपना काम है। यदि बच्चा उम्र से पहले अगली कक्षा में धकेल दिया जाए तो सीढ़ी का एक पायदान छूट जाता है, जिसका असर कक्षा 1 में दिखता है। इसलिए “जल्दी शुरुआत” को लाभ मानने के बजाय राज्य और स्कूल के लिखित नियम को ही आधार बनाएं।
नर्सरी बनाम LKG बनाम UKG: अंतर
| बात | नर्सरी | एलकेजी | यूकेजी |
|---|---|---|---|
| उम्र | 3-4 साल | 4-5 साल | 5-6 साल |
| लिखना | सिर्फ स्ट्रोक/लाइनें | अक्षर लिखना शुरू | शब्द और सरल वाक्य |
| गिनती | 1-20 | 1-50 | 1-100 |
| उद्देश्य | स्कूल से जुड़ना, पहचान | बुनियाद बनाना | कक्षा 1 की तैयारी |
तालिका में तीनों स्तरों का अंतर सबसे साफ गिनती और लिखने में दिखता है। गिनती का दायरा हर साल चौड़ा होता जाता है — नर्सरी में 1-20 की पहचान, LKG में 1-50 और UKG में 1-100; जबकि लिखना स्ट्रोक से शुरू होकर अक्षरों और फिर शब्द-वाक्यों तक पहुंचता है। इससे स्पष्ट है: नर्सरी में यदि बच्चा अक्षर नहीं लिख पा रहा है तो यह कमी नहीं है — उस स्तर पर लिखना लक्ष्य ही नहीं है। माता-पिता की चिंता का केंद्र पहचान, बोलचाल और स्कूल से जुड़ाव होना चाहिए।
नर्सरी के लिए स्कूल चुनते समय क्या देखें
सिलेबस से ज़्यादा ज़रूरी है सही स्कूल चुनना। दाखिले से पहले इन बातों की जांच करें:
- खेल-आधारित पढ़ाई: क्या स्कूल में खेल का मैदान, खिलौने और गतिविधि-कक्ष हैं? सिर्फ किताबी पढ़ाई वाले स्कूल से बचें।
- शिक्षक-बच्चा अनुपात: एक कक्षा में बच्चों की संख्या कम हो तो हर बच्चे पर ध्यान जाता है।
- परीक्षा का दबाव: नर्सरी में लिखित परीक्षा लेने वाले स्कूल एनसीईआरटी की भावना के खिलाफ हैं — ऐसे स्कूल से सावधान रहें।
- सुरक्षा: सीसीटीवी, प्रशिक्षित सहायक, बच्चों के हिसाब से बने शौचालय और सुरक्षित खेल-क्षेत्र।
- दूरी: नर्सरी के बच्चे के लिए स्कूल घर से ज़्यादा दूर न हो — लंबा सफर थकान और चिड़चिड़ापन लाता है।
- माता-पिता से संवाद: क्या स्कूल नियमित रूप से बच्चे की प्रगति की जानकारी देता है?
बच्चे पर दबाव न डालें
NCERT के सिद्धांतों के अनुसार नर्सरी में:
- कोई औपचारिक परीक्षा नहीं होती — मूल्यांकन खेल और गतिविधियों से होता है
- लिखने का दबाव नहीं डालना चाहिए — पहले स्ट्रोक, फिर अक्षर
- दूसरे बच्चों से तुलना नहीं करनी चाहिए — हर बच्चे की रफ्तार अलग होती है
- रट्टा लगवाना (बिना समझे याद करवाना) NCERT के विरुद्ध है
- रोज 2-3 घंटे से ज्यादा पढ़ाई का बोझ 3-4 साल के बच्चे के लिए ठीक नहीं
अगर स्कूल नर्सरी में लिखित परीक्षा ले रहा है या बच्चे पर लिखने का दबाव बना रहा है, तो यह NCERT के खेल-आधारित सिद्धांत के खिलाफ है — स्कूल से बात करना उचित है।
माता-पिता की आम गलतियाँ
“CBSE सिलेबस” खोजकर घबराना: इंटरनेट पर मिलने वाली सूचियों को बोर्ड का आदेश मानकर कई माता-पिता बच्चे को उसी रफ्तार से चलाने लगते हैं। जैसा ऊपर बताया गया है, ऐसा कोई आधिकारिक सिलेबस है ही नहीं — वे सूचियां अलग-अलग स्कूलों के अपने प्लान हैं। आधार सिर्फ अपने स्कूल का लिखित प्लान रखें।
लिखवाने की जल्दबाजी: पहचान और स्ट्रोक से पहले सीधे अक्षर लिखवाने का दबाव बच्चे की पकड़ और रुचि — दोनों को नुकसान पहुंचाता है। पहले उंगलियों की कसरत (ट्रेसिंग, मिट्टी, कागज फाड़ना) पूरी होने दें; अक्षर अपने समय पर आएंगे।
दूसरे बच्चे या दूसरे स्कूल से तुलना: हर बच्चे की रफ्तार अलग होती है और हर स्कूल का प्लान भी। पड़ोस के बच्चे या रिश्तेदार के स्कूल के प्लान से तुलना करके बच्चे पर दबाव बनाना NCERT के सिद्धांतों के सीधे विरुद्ध है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नर्सरी में एडमिशन के लिए उम्र कितनी होनी चाहिए?
आम तौर पर 3+ साल। NCF 2022 के अनुसार कक्षा 1 छह साल में शुरू होता है, इस हिसाब से नर्सरी 3 साल से। सटीक नियम स्कूल और राज्य के हिसाब से अलग हो सकता है — एडमिशन से पहले स्कूल से कन्फर्म करें।
नर्सरी क्लास में कौन-कौन से विषय होते हैं?
अंग्रेज़ी (स्ट्रोक, A-Z), हिंदी (अ-ज्ञ, कविता), गणित (1-20, आकृतियां, रंग), सामान्य ज्ञान (मेरा परिचय, मेरा परिवार, जानवर, मौसम), कविताएं-कहानियां और आर्ट-क्राफ्ट। कोई बोर्ड इन्हें निर्धारित नहीं करता — ये स्कूलों का आम पैटर्न है।
क्या नर्सरी का कोई आधिकारिक सिलेबस है?
नहीं। भारत में नर्सरी का कोई आधिकारिक विषय-वार सिलेबस नहीं है। एनसीईआरटी सिर्फ प्रीस्कूल शिक्षा के दिशा-निर्देश और एनसीएफ बुनियादी चरण 2022 जैसे विकासात्मक निर्देश देता है; स्कूल अपना सिलेबस खुद बनाते हैं।
नर्सरी, LKG और UKG में क्या अंतर है?
नर्सरी (3-4 साल) में सिर्फ पहचान और स्ट्रोक; LKG (4-5 साल) में अक्षर लिखना शुरू और 1-50; UKG (5-6 साल) में शब्द-वाक्य और 1-100 — कक्षा 1 की तैयारी।
3-4 साल के बच्चे को घर पर क्या सिखाएं?
रोज कहानी सुनाना, कविताएं गाना, रंगों-आकृतियों की पहचान, 1-10 गिनना, प्रकृति सैर, मुक्त चित्रकारी और शिष्टाचार। लिखने का दबाव न डालें — पहले उंगलियों की कसरत (ट्रेसिंग, मिट्टी, कागज फाड़ना) करवाएं।
क्या नर्सरी में परीक्षा होती है?
नहीं होनी चाहिए। NCERT के अनुसार प्रीस्कूल में औपचारिक परीक्षा नहीं होती — बच्चे का मूल्यांकन खेल, गतिविधियों और रोज के निरीक्षण से होता है।
आधिकारिक जानकारी कहां से लें
नर्सरी से जुड़ी सही और नवीनतम जानकारी के लिए इन्हीं आधिकारिक दस्तावेज़ों को देखें: एनसीईआरटी के प्रीस्कूल शिक्षा के लिए दिशा-निर्देश, प्रीस्कूल पाठ्यचर्या, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा — बुनियादी चरण 2022 और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का राष्ट्रीय ईसीसीई पाठ्यचर्या ढांचा।
इसके साथ ही अपने बच्चे के स्कूल से लिखित में उसका सालाना प्लान ज़रूर लें — क्योंकि आखिर में वही प्लान आपके बच्चे पर लागू होगा।
Last Updated: 21 October 2026
