UPSC CSE Mains में Political Science and International Relations (PSIR) ऑप्शनल विषय के दो पेपर होते हैं। पेपर 1 में Political Theory और Indian Politics है, पेपर 2 में Comparative Politics और International Relations। दोनों पेपर 250-250 अंक के होते हैं और प्रश्न-पत्र हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में छपता है।
ऑप्शनल के 500 अंक Mains की रैंक में बड़ा अंतर बनाते हैं। PSIR इसलिए सबसे लोकप्रिय ऑप्शनल विषयों में गिना जाता है — इसका सिलेबस सीमित और स्थिर है, और इसकी तैयारी का बड़ा हिस्सा GS पेपर्स में सीधे काम आता है। हिंदी मीडियम के छात्रों के लिए भी यह उपयुक्त है, क्योंकि प्रश्न-पत्र हिंदी में छपता है और उत्तर हिंदी में लिखे जा सकते हैं।
इस पेज में:
- PSIR Optional Exam Pattern
- PSIR ही क्यों चुनें: अन्य Optionals से तुलना
- Paper 1 Syllabus: Political Theory and Indian Politics
- Paper 2 Syllabus: Comparative Politics and International Relations
- GS Papers से Overlap
- पिछले साल से क्या बदला
- Hindi Medium में PSIR
- किताबें
- तैयारी के लिए ज़रूरी बातें
- छात्रों की आम गलतियाँ
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
PSIR Optional Exam Pattern
| Paper | विषय | अंक | समय |
|---|---|---|---|
| Paper VI | PSIR Paper 1 | 250 | 3 घंटे |
| Paper VII | PSIR Paper 2 | 250 | 3 घंटे |
- हर पेपर में 8 प्रश्न होते हैं, दो खंडों (Section A और Section B) में बंटे हुए।
- प्रश्न संख्या 1 और 5 अनिवार्य हैं। कुल 5 प्रश्न हल करने होते हैं, हर खंड से कम से कम एक।
- प्रश्न-पत्र हिंदी और अंग्रेजी दोनों में छपा होता है। आप किसी भी एक भाषा में उत्तर लिख सकते हैं।
- Syllabus का स्तर ऑनर्स डिग्री लेवल का माना जाता है।
- दोनों पेपर मिलाकर 500 अंक Mains के कुल 1750 लिखित अंकों का हिस्सा हैं।
पैटर्न की सबसे महत्वपूर्ण बात प्रश्न-चयन का नियम है — हर पेपर में कुल 5 प्रश्न हल करने होते हैं, जिनमें प्रश्न 1 और 5 अनिवार्य हैं और हर खंड से कम से कम एक प्रश्न चुनना ज़रूरी है। अर्थात कोई खंड पूरी तरह छोड़ा नहीं जा सकता। सिलेबस का स्तर ऑनर्स डिग्री स्तर का माना जाता है — केवल जानकारी नहीं, अवधारणाओं की समझ और उन्हें वर्तमान घटनाओं से जोड़ने की क्षमता परखी जाती है।
PSIR ही क्यों चुनें: अन्य Optionals से तुलना
ऑप्शनल चुनते समय सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि इतने विषयों में से कौन-सा लिया जाए। PSIR की स्थिति चार बिंदुओं पर स्पष्ट होती है। पहला, GS से ओवरलैप — पेपर 1 का Section B लगभग पूरा GS Paper 2 (Polity) से मिलता है और पेपर 2 GS Paper 2 के International Relations हिस्से को कवर करता है; इतना सीधा ओवरलैप कम ही ऑप्शनल विषयों में मिलता है। दूसरा, सिलेबस की स्थिरता — PSIR का सिलेबस सालों से स्थिर है और 2026 तक इसमें कोई बदलाव घोषित नहीं हुआ है। तीसरा, सीमित दायरा — दोनों पेपर्स मिलाकर कुल 40 टॉपिक हैं, जिन्हें गिनकर योजना बनाई जा सकती है। चौथा, करंट अफेयर्स से जुड़ाव — विशेषकर पेपर 2 में ताज़ा घटनाओं को सिद्धांत से जोड़कर लिखने से उत्तर मज़बूत बनता है।
किसके लिए यह सही है, यह भी स्पष्ट है। जिन छात्रों ने स्नातक में राजनीति विज्ञान पढ़ा है, उन्हें Section A पहले से परिचित लगेगा। जिन्हें सिद्धांत पढ़ना और तर्कपूर्ण लेखन पसंद है — न्याय, समता, लोकतंत्र जैसी अवधारणाओं पर विचार करना — वे इसमें सहज रहेंगे। जिन्हें सिद्धांत-प्रधान पढ़ाई बोझ लगती है या लेखन अभ्यास कम है, उन्हें कठिनाई होगी, क्योंकि यहाँ अंक जानकारी से ज़्यादा विश्लेषण से मिलते हैं। निर्णय रुचि और लेखन-क्षमता देखकर लें — केवल लोकप्रियता देखकर ऑप्शनल चुनना आगे चलकर भारी पड़ता है।
Paper 1 Syllabus: Political Theory and Indian Politics
पेपर 1 के दो हिस्सों की प्रकृति अलग है — Section A में अवधारणाएँ और विचारक, Section B में संस्थाएँ और समकालीन भारतीय राजनीति।
Section A: Political Theory (10 टॉपिक)
- Political Theory: राजनीति के मूल सिद्धांतों का अध्ययन — सत्ता, न्याय, समता जैसे प्रत्ययों की व्याख्या और उनका विकास।
- राज्य के सिद्धांत: राज्य क्या है — उदारवादी, मार्क्सवादी, बहुलवादी और नारीवादी दृष्टिकोणों से राज्य की प्रकृति।
- न्याय: Rawls का “veil of ignorance” सिद्धांत, Nozick का अधिकार-आधारित न्याय और समुदायवादी आलोचना।
- समता: अवसर, परिणाम और गरिमा की समता; सकारात्मक कार्रवाई (affirmative action) पर बहस।
- अधिकार: प्राकृतिक अधिकारों से मानवाधिकारों तक का सफ़र; अधिकार और कर्तव्य का संबंध।
- लोकतंत्र: शास्त्रीय, अभिजातवादी, बहुलवादी और विचार-विमर्शात्मक (deliberative) लोकतंत्र के रूप।
- सत्ता की अवधारणा: शक्ति, सत्ता और वैधता में अंतर; Weber और Foucault के विचार।
- राजनीतिक विचारधाराएं: उदारवाद, समाजवाद, मार्क्सवाद, फ़ासिवाद, गांधीवाद और नारीवाद की मूल स्थिति।
- भारतीय राजनीतिक चिंतन: धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र और बौद्ध परंपरा; Sir Syed Ahmed Khan, Sri Aurobindo, M.K. Gandhi, B.R. Ambedkar, M.N. Roy।
- पाश्चिमी राजनीतिक चिंतन: Plato, Aristotle, Machiavelli, Hobbes, Locke, Mill, Marx, Gramsci, Hannah Arendt।
Section A में अंक अवधारणाओं की स्पष्टता से आते हैं। न्याय, समता, अधिकार, लोकतंत्र और सत्ता — ये पाँच अवधारणाएँ इस खंड की रीढ़ हैं; हर अवधारणा के साथ विचारकों की स्थिति जोड़कर लिखने से उत्तर अलग दिखता है। उदाहरण के लिए न्याय के प्रश्न में Rawls, Nozick और समुदायवादी आलोचना — तीनों दृष्टिकोण संतुलित रूप में रखना ही इस खंड की माँग है। भारतीय और पाश्चात्य राजनीतिक चिंतन के टॉपिक अपेक्षाकृत तथ्य-आधारित हैं; विचारकों की सूची तय है, इसलिए इन्हें नोट्स बनाकर पक्का किया जा सकता है और ये सबसे भरोसेमंद अंक दिलाते हैं।
Section B: Indian Government and Politics (11 टॉपिक)
- भारतीय राष्ट्रवाद: राष्ट्रवाद के सिद्धांत; उपनिवेश-विरोधी संघर्ष से राष्ट्रवाद का उदय।
- संविधान का निर्माण: संविधान सभा, उद्देश्य प्रस्ताव और संविधान निर्माण की बहसें।
- संविधान की मुख्य विशेषताएं: प्रस्तावना, मूल अधिकार, राज्य के नीति निदेशक तत्व, मूल कर्तव्य।
- संघ और राज्य के प्रमुख अंग: कार्यपालिका, संसद, न्यायपालिका; संघ-राज्य संबंध।
- जड़ लोकतंत्र (Grassroots Democracy): पंचायती राज, 73वां और 74वां संविधान संशोधन, नगर निकाय।
- संवैधानिक संस्थाएं: चुनाव आयोग, UPSC, CAG, वित्त आयोग की भूमिका और स्वतंत्रता।
- संघवाद (Federalism): सहयोगी संघवाद; राज्यों की स्वायत्तता पर बहस।
- योजना और आर्थिक विकास: नेहरूवियन मॉडल से 1991 के सुधारों तक; NITI Aayog की भूमिका।
- जाति, धर्म और नृजातीयता: सांप्रदायिकता, आरक्षण की राजनीति, क्षेत्रीयवाद।
- दल प्रणाली: एक-दल प्रभुत्व से गठबंधन युग तक; दल-बदल विरोधी कानून।
- सामाजिक आंदोलन: किसान, श्रमिक, महिला और पर्यावरण आंदोलन; नागरिक समाज की भूमिका।
Section B का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसकी तैयारी का अधिकांश हिस्सा GS Paper 2 (Polity) की तैयारी से ही पूरा हो जाता है — इसके प्रमुख टॉपिक दोनों जगह समान हैं। इसलिए इसे अलग रटने के बजाय GS की तैयारी को ऑप्शनल स्तर तक गहरा करें। जाति, धर्म, दल प्रणाली और सामाजिक आंदोलन जैसे गतिशील टॉपिकों में वर्तमान उदाहरण जोड़ने से उत्तर जीवंत बनता है।
Paper 2 Syllabus: Comparative Politics and International Relations
पेपर 2 अधिक गतिशील है — Section B भारत की विदेश नीति पर केंद्रित है, जहाँ हर साल की घटनाएँ नए प्रश्नों का आधार बनती हैं।
Section A: Comparative Political Analysis and International Politics (11 टॉपिक)
- तुलनात्मक राजनीति: प्रकृति और क्षेत्र; राजनीतिक व्यवस्थाओं की तुलना की पद्धतियां।
- तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य में राज्य: पूंजीवादी, समाजवादी और विकासात्मक राज्य के रूप।
- प्रतिनिधित्व और भागीदारी: चुनाव प्रणाली, दल प्रणाली, दबाव समूह और जन आंदोलन।
- वैश्वीकरण: अर्थ और प्रभाव; राज्य की संप्रभुता पर उठने वाले सवाल।
- अंतरराष्ट्रीय संबंधों के दृष्टिकोण: यथार्थवाद, उदारवाद, मार्क्सवादी और निर्माणवादी दृष्टिकोण।
- IR की प्रमुख अवधारणाएं: राष्ट्रीय हित, शक्ति संतुलन, सामूहिक सुरक्षा।
- बदलता अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक क्रम: शीत युद्ध से एकध्रुवीय और फिर बहुध्रुवीय विश्व तक।
- अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली: Bretton Woods से WTO तक; उत्तर-दक्षिण विभाजन।
- संयुक्त राष्ट्र: उद्देश्य, संरचना, सुधार की बहस; शांति स्थापना अभियान।
- क्षेत्रीयकरण: EU, ASEAN, SAARC जैसे क्षेत्रीय संगठनों की भूमिका।
- समकालीन वैश्विक चिंताएं: जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, शरणार्थी समस्या, मानवाधिकार।
Section A की शुरुआत तुलनात्मक राजनीति से होती है — इसमें तुलना की पद्धति, राज्य के स्वरूप और प्रतिनिधित्व-भागीदारी जैसे विषय आते हैं। इसके बाद IR के दृष्टिकोण (यथार्थवाद, उदारवाद, मार्क्सवादी, निर्माणवादी) और प्रमुख अवधारणाएँ (राष्ट्रीय हित, शक्ति संतुलन, सामूहिक सुरक्षा) इस खंड का सैद्धांतिक आधार हैं — ये Section B के उत्तरों की नींव हैं। संयुक्त राष्ट्र, क्षेत्रीय संगठन और समकालीन वैश्विक चिंताएँ (जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, शरणार्थी समस्या) सिद्धांत और वर्तमान का संगम हैं — यहीं से विश्लेषणात्मक प्रश्न बनते हैं।
Section B: India and the World (8 टॉपिक)
- भारतीय विदेश नीति: निर्धारक तत्व और मूल सिद्धांत; निरंतरता और परिवर्तन की बहस।
- गुटनिरपेक्ष आंदोलन: स्थापना, शीत युद्ध में भूमिका, वर्तमान प्रासंगिकता।
- भारत और दक्षिण एशिया: पड़ोसी प्रथम नीति; SAARC और BIMSTEC।
- भारत और Global South: विकास सहयोग; दक्षिण-दक्षिण सहयोग।
- शक्ति के वैश्विक केंद्र: US, EU, Japan, China, Russia; इनमें भारत की स्थिति।
- भारत और संयुक्त राष्ट्र: सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग।
- परमाणु प्रश्न: भारत की परमाणु नीति; NPT और CTBT पर भारत का रुख।
- हाल के विकास: समकालीन विदेश नीति के मुद्दे और घटनाएं।
Section B में अंक ताज़ा जानकारी और उसके विश्लेषण से आते हैं। भारतीय विदेश नीति के निर्धारक तत्व और मूल सिद्धांत इस खंड का आधार हैं; उसके बाद हर क्षेत्र — दक्षिण एशिया, Global South, वैश्विक शक्ति-केंद्र और संयुक्त राष्ट्र — उसी आधार पर खड़ा होता है। परमाणु प्रश्न जैसे टॉपिक में भारत का रुख़ (NPT और CTBT पर स्थिति) तथ्यों के साथ तर्क मांगता है। इस खंड की तैयारी नियमित अध्ययन से बनती है — पिछले 1-2 साल की घटनाओं को हर टॉपिक से जोड़कर छोटे नोट्स तैयार रखें।
GS Papers से Overlap
PSIR लेने का सबसे बड़ा फ़ायदा GS पेपर्स से ओवरलैप है। एक ही तैयारी दोनों जगह काम आती है।
| PSIR का हिस्सा | GS में ओवरलैप |
|---|---|
| Paper 1 Section B (Indian Government and Politics) | GS Paper 2 (Polity) — लगभग पूरा syllabus मिलता है |
| Paper 2 (International Relations) | GS Paper 2 (International Relations) का बड़ा हिस्सा |
| Political Theory के विचारक | GS Paper 4 (Ethics) — न्याय, समता, अधिकार के प्रश्न |
| Indian Political Thought | GS Paper 1 — आधुनिक इतिहास के कुछ हिस्से |
ओवरलैप का व्यावहारिक अर्थ समझिए — पेपर 1 का Section B तैयार करते ही GS Paper 2 की Polity तैयारी का बड़ा हिस्सा साथ तैयार हो जाता है। राजनीतिक सिद्धांत के विचारक GS-4 (Ethics) में और भारतीय राजनीतिक चिंतन GS-1 के आधुनिक इतिहास हिस्से में भी काम आता है। ध्यान रखें — ऑप्शनल के उत्तर GS से अधिक विश्लेषणात्मक होते हैं; ओवरलैप विषय का है, स्तर का नहीं।
पिछले साल से क्या बदला
PSIR का syllabus सालों से स्थिर है। 2026 तक इसमें कोई बदलाव घोषित नहीं हुआ है। तैयारी पुराने syllabus के अनुसार ही करें, लेकिन CSE 2026 का notification आने पर एक बार आधिकारिक सूची से मिला लेना उचित रहेगा।
Hindi Medium में PSIR
PSIR हिंदी मीडियम के छात्रों के लिए उपयुक्त ऑप्शनल है। प्रश्न-पत्र आधिकारिक तौर पर हिंदी और अंग्रेजी दोनों में छपता है, इसलिए आप पूरा पेपर हिंदी में लिख सकते हैं। विचारकों के मूल शब्दों को याद रखना हिंदी में थोड़ी मेहनत मांगता है — हर thinker के 2-3 प्रमुख कथन अलग से तैयार रखें।
किताबें
PSIR में किताबों की सूची लंबी करने के बजाय हर खंड के लिए एक-दो मानक किताबें पक्की करना सही तरीका है:
| किताब | लेखक | किस के लिए |
|---|---|---|
| An Introduction to Political Theory | O.P. Gauba | Paper 1 Section A |
| Indian Polity | M. Laxmikanth | Paper 1 Section B |
| Indian Government and Politics | B.L. Fadia | Paper 1 Section B |
| Political Theory: An Introduction | Rajiv Bhargava | Paper 1 Section A |
| Global Politics | Andrew Heywood | Paper 2 Section A |
Paper 2 Section B (India and the World) के लिए नियमित current affairs और विदेश नीति पर कोई मानक पुस्तक साथ रखें।
पढ़ने का क्रम यह रखें — सबसे पहले Paper 1 Section A के लिए O.P. Gauba या Rajiv Bhargava से सिद्धांतों की नींव बनाएँ। उसके साथ M. Laxmikanth की Indian Polity शुरू करें; B.L. Fadia की किताब उसी हिस्से को विस्तार देती है। Paper 2 Section A के लिए Andrew Heywood की Global Politics उपयोगी है। एक विषय के लिए एक ही किताब बार-बार पढ़ना, कई किताबें एक-एक बार पढ़ने से बेहतर होता है।
तैयारी के लिए ज़रूरी बातें
तैयारी की रणनीति तीन स्तंभों पर टिकती है — हर टॉपिक के तैयार नोट्स, विचारकों के कथनों का संग्रह और नियमित उत्तर-लेखन अभ्यास। लिखने का अभ्यास ही जानकारी को अंकों में बदलता है। उत्तर का ढांचा रखें — प्रस्तावना में अवधारणा की परिभाषा, मुख्य भाग में विचारकों के दृष्टिकोण और अंत में संतुलित निष्कर्ष।
- हर टॉपिक के साथ 2-3 विचारकों के नाम और उनकी एक-लाइन स्थिति याद रखें — उत्तर में उद्धरण अंक दिलाता है।
- पेपर 2 में पिछले 1-2 साल की घटनाओं को सिद्धांत से जोड़कर लिखें। IR में तिथि-रहित उत्तर कमज़ोर लगता है।
- प्रश्न चुनने की रणनीति पहले से तय करें — अपने मज़बूत खंड से 3 प्रश्न, कमज़ोर से 2।
- उत्तर लेखन का अभ्यास 7-8 मिनट प्रति प्रश्न की गति से करें, क्योंकि 3 घंटे में 5 विस्तृत उत्तर लिखने होते हैं।
उत्तर-लेखन का अभ्यास तैयारी के दूसरे महीने से ही शुरू कर देना चाहिए । दोहराव (revision) के कम से कम दो चक्र रखें — पहला पूरा सिलेबस खत्म होने पर, दूसरा परीक्षा से ठीक पहले, केवल नोट्स से।
छात्रों की आम गलतियाँ
PSIR में अधिकांश अभ्यर्थी जानकारी की कमी से नहीं, आदतों की वजह से अंक गंवाते हैं। पहली गलती — केवल पढ़ना, उत्तर न लिखना: सिद्धांत समझ आने का भ्रम तब टूटता है जब 3 घंटे में 5 विस्तृत उत्तर लिखने पड़ते हैं। दूसरी — पेपर 2 में करंट अफेयर्स न जोड़ना: बिना ताज़ा उदाहरणों के IR के उत्तर सामान्य लगते हैं। तीसरी — एक खंड पूरी तरह छोड़ना: प्रश्न-चयन का नियम हर खंड से कम से कम एक प्रश्न अनिवार्य करता है। चौथी — विचारकों के नाम बिना उनकी स्थिति जाने लिखना: नामों की सूची उद्धरण नहीं होती। पाँचवी — किताबों का ढेर लगाना: मानक किताबें दोबारा पढ़ना नई किताब खोजने से बेहतर है। छठी — GS और ऑप्शनल के उत्तर एक जैसे लिखना: ऑप्शनल में विश्लेषण की गहराई अधिक अपेक्षित होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
PSIR ऑप्शनल में कुल कितने अंक होते हैं?
500 अंक — पेपर 1 और पेपर 2, दोनों 250-250 अंक के।
हर पेपर की अवधि कितनी होती है?
हर पेपर 3 घंटे का होता है।
क्या PSIR का पेपर हिंदी में मिलता है?
हां। प्रश्न-पत्र हिंदी और अंग्रेजी दोनों में छपता है, और आप हिंदी में उत्तर लिख सकते हैं।
क्या PSIR में current affairs पढ़ना पड़ता है?
हां, विशेषकर पेपर 2 (International Relations) में पिछले 1-2 साल की घटनाएं महत्वपूर्ण हैं।
Political Science और PSIR में क्या अंतर है?
कोई अंतर नहीं। PSIR ही Political Science ऑप्शनल का आधिकारिक नाम है, जिसमें International Relations भी शामिल है।
PSIR ऑप्शनल का आधिकारिक syllabus UPSC की वेबसाइट पर CSE notification के साथ PDF में मिलता है। आवेदन से पहले नवीनतम notification से syllabus ज़रूर मिला लें।
Last Updated: 21 October 2026